Sunday, March 6, 2011

करेला नीम चढ़ा

                                           करेला नीम चढ़ा
                                                                                                             पवित्रा अग्रवाल

"किस का फोन था सोनाली?'
 "लखनऊ से मम्मी का था।कल घर पहुँचने को कहा है।'
 "क्या कोइ खास बात है... वहाँ सब ठीक तो है ?'
 " हाँ सब ठीक है।कहीं शादी की बात चल रही होगी...मुझे कोइ देखने आने वाला है...इसी लिये बुलाया है।'
  " लड़का क्या करता है?
  "पता नही।..मुझे यह देखने-दिखाने का सिलसिला बहुत खराब लगता है...              
  दो दिन बाद सोनाली के लौटने पर महिमा ने पूछा -"देखना दिखाना हो गया...लड़का क्या करता       ?'
  "पुलिस मे है .... मुझे तो पुलिस वालो से बहुत डर लगता है...रोज उनके नये नये कारनामें पेपर मे पढ़ लो।'
  महिमा ने छेड़ा-"सैयाँ भये कोतवाल तो डर काहे का ?...पिता क्या करते हैं ?'
  "विधायक है'
" "यह तो सोने मे सुहागा हो गया।...बात पक्की हो गयी ?'
  "अभी नहीं वह लोग घर जाकर जवाब देंगे। भगवान करे वहाँ से ना आजाये...मैं इनकार करूँगी तो मम्मी - पापा को अच्छा नहीं लगेगा क्यो कि उन्हें यह रिश्ता पसन्द है'
 "तुझे यह रिश्ता पसन्द क्यो नही है ?'
  "एक तो करेला वो भी नीम चढ़ा'
  "तू एसा क्यो कह रही है ?'
 "तो और क्या कहूँ ?..लड़का पुलिस मे है और उसका पिता पौलिटिक्स में।'            
                                                              
-पवित्रा अग्रवाल

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