Monday, April 9, 2018

मोहभंग



लघुकथा
                 मोहभंग
                              
                पवित्रा अग्रवाल

सुबह की सैर के समय दोस्त स्मिता ने पूछा --
 ‘पूनम ,आज अहोई आठें हैं ,तुमने तो व्रत रखा होगा ?’
‘नहीं स्मिता  इस बार नहीं रखा .’
‘तुम तो हमेशा बड़ी श्रद्धा से यह व्रत रखती थीं ,इस बार क्यों नहीं ?’                            
         
'बस ऐसे ही ,अब भूखा नहीं रहा जाता ’
‘नहीं पूनम  बात तो कुछ और है ,तू बहुत उदास भी दिख रही है ’
‘अब क्या बताऊँ, इन व्रत उपवासों से  मोहभंग हो गया है .एक ही बेटा है जिस के जन्म लेने से पहले ही उसके पिता की मौत हो गई थी .माता पिता ने दूसरी शादी करने के लिए बहुत जोर डाला था पर बेटे के प्रति फर्ज और ममता ने कुछ नहीं सोचने दिया .आज वही बेटा दूर बहुत दूर अपने बीबी बच्चों के साथ अमेरिका जा बैठा है और कभी दिखाने को भी नहीं कहता कि अब आप को मेरे साथ रहना है ‘
  ‘पता नहीं बच्चे इतने संवेदनहीन और स्वार्थी कैसे हो जाते है’
 ‘अब तक तो माँ थी और नौकरी भी .अब न नौकरी रही न माँ .बहुत अकेली हूँ '                           
                            
  
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Sunday, March 18, 2018

धमकी

लघुकथा 
                       धमकी
                                       पवित्रा अग्रवाल

              अस्पताल में कुछ लोगों द्वारा डाक्टर को पीटते देख कर मरीजों के रिश्तेदार परेशान हो गए---
 एक व्यक्ति चिल्लाया --"अरे आप डाक्टर को क्यों मार रहे हैं ?'
     "मारें नहीं तो क्या करें ..इनकी आरती उतारें ? जाने कहाँ कहाँ से आकर डाक्टर बन गए हैं ,इन्हों  ने हमारे इकलौते बेटे की जान ले ली ।'
    दूसरे व्यक्ति ने तर्क दिया --"अस्पताल में आने वाला हर मरीज ठीक हो कर ही तो घर नहीं जाता ?'
    एक अन्य ने हॉ में हाँ मिलाई --"बिल्कुल,.. कुछ ठीक हो जाते हैं तो कुछ की मौत भी हो जाती है ।'
   "आप का बेटा तो चला गया... आप इस तरह मार-पीट करेंगे तो दूसरे  बहुत से मरीज बेमौत मारे  जाएगे ।'
 "वो कैसे ?'
 "आप मारपीट और तोड़-फोड़ करेंगे तो सब डाक्टर्स हड़ताल पर चले जाएगे फिर दूसरे मरीजों का  क्या होगा ?'
 "आप लोग कौन हैं  ?'
 "हम यहाँ पर भर्ती मरीजों के रिश्तेदार हैं ..दूर हटिए हम आप को डाक्टर से मार-पीट नहीं करने  देंगे.. ।'
 "हाँ भैया यदि आपका बेटा डाक्टर की गल्ती से मरा है तो आप कम्पलेन्ट कीजिए।पर....
   अपने को अकेला पड़ते देख कर वह झुंझला कर बोला ----   "आप मुझे जानते नहीं ,मैं एसे चुप नहीं बैठूँगा, अभी भैया जी को ले कर आता हूँ ।'

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--
-पवित्रा अग्रवाल
 

Saturday, February 3, 2018

झटका

मेरे लघुकथा  संग्रह -- 'आँगन से राजपथ ' से -----
 
लघुकथा
               
    झटका                       
                                      पवित्रा अग्रवाल

         राधा को खाना बनाते देख कर वसुधा ने पूछा --- "अरे राधा तेरी आँखों को क्या हुआ ?'
 "वो आज कल आँखें लाल होने की बीमारी फैल रही है न ...वही हमें भी हो गई है...घर में सब को हो रही है।'
 "फिर तुझे काम पर नहीं आना चाहिए था ।'
 "अम्मा इस महीने वैसे ही कई छुट्टी ले ली हैं.. अब फिर घर बैठ जाऊँगी तो घर खर्च कैसे चलेगा ?'
  "पर मेरे घर में भी छोटे छोटे बच्चे हैं ... उन्हें इंफैक्शन हो गया तो...। तू जा, खाना हम बना लेंगे।...ठीक होने के बाद आ जाना ।'
 "ठीक है अम्मा आप कह रही हो तो चली जाती हूँ पर इसे डुम्मा नहीं मानना ?'
 "ठीक है अब तू जा...और हाँ अपनी सहेली को बोलना कुछ दिन के लिए वह आ कर खाना बना दे, उसे पैसे दे दूँगी ।'
 दूसरे दिन वसुधा भी उस रोग की चपेट में आ गई थी।राधा की सहेली खाना बनाने आई तो लाल आँखें  देख कर बोली - "क्या अम्मा आपको भी लग गई यह बीमारी ?'
 "हाँ लग तो ऐसा ही रहा है...रसोइ में चल तुझे बतादूँ कि क्या बनाना है ।'
 "नहीं अम्मा हम काम नहीं कर पाएगे...हमें भी हो गई तो ?'
    वसुधा को झटका सा लगा  -- "अरे ज्यादा पैसे ले लेना ।'
    पर वह जा चुकी थी ।

 
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Wednesday, January 24, 2018

लघुकथा
                   फतवा
                                                       पवित्रा अग्रवाल

      
नजमा ने जब से टी वी पर मुजफ्फरनगर की इमराना की खबर सुनी है तब से  वह बहुत परेशान है ।पाँच बच्चों की माँ इमराना ने अपने सगे ससुर पर बलात्कार का आरोप लगा कर उसे सजा दिलानी चाही थी पर उलेमाओं ने फतवा जारी कर दिया कि अब से इमराना अपने पति के लिए हराम है । वह अपने पति को बेटा माने और ससुर की पत्नी बन कर रहे ।'
 पर नजमा क्या करे, उसकी तो अभी शादी भी नहीं हुई है । उसके साथ तो सगा भाई और अब्बा दोनो बलात्कार करते रहे हैं पर वह अब तक शिकायत की हिम्मत नहीं जुटा पाई । यदि वह अब्बा और भाईजान दोनो पर पंचायत में इल्जाम लगाती है तो पता नहीं यह मौलवी और उलेमा उसके लिए क्या फतवा जारी करेंगे ?बाप की बीबी बनने को कहेंगे या भाई की ?


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Friday, December 22, 2017

तरीका गलत था

लघुकथा
                  तरीका गलत था      
                                                 पवित्रा अग्रवाल


        मीता सुबह सो कर उठी तो भाभी गद्दे पर पाउडर डाल रही थीं।उसे देख कर वह पिंकी को  थप्पड़ मारते हुये बोलीं -- "देखो न मीता पिंकी  कभी ऐसा नहीं करती पर पता नहीं कैसे आज  इसने बिस्तर गीला कर दिया है।'
         भाभी की इस बात पर उसे दो महीने पहले की घटना याद आ गई थी।वह एक सप्ताह के लिये भाई के आग्रह पर उनके पास गई थी ।आठ महीने के बन्टी ने हॉल में पेशाब कर दिया था ।..उसने पेशाब कपड़े से पौंछ कर कपड़ा बाहर धूप में डाल दिया था ।तभी भाभी ने कुछ चिड़ी हुई सी आवाज में कहा --"मीता एक बार गीले कपड़े से यह जगह पोंछ दो वरना पूरे दिन बदबू आती रहेगी फिर कपड़ा धो कर बाहर धूप में डाल देना ।'
        यों भाभी ने ऐसा कुछ गलत नहीं कहा था पर उनके कहने के ढ़ंग से वह आहत हुई थी।उसे याद था इन्हीं भाभी की बिटिया ने कई बार उसके गद्दे गीले किए थे...पर अब उनके बच्चे बड़े हो गए हैं तो मुझे सफाई सिखा रही हैं।...पर वह चुप रही थी ।
    आज उन्ही भाभी की बिटिया ने फिर मीता का गद्दा गीला कर दिया था, जब कि वह इतनी छोटी भी नहीं थी ।पिंकी को रोता देख कर वह बोली --"देखो भाभी रुला दिया न उसे ।...क्या हो गया गीला कर दिया तो, क्या बंटी गीला नहीं करता ?...थोड़ी देर में धूप निकलेगी तो गद्दा धूप में डाल दूँगी ।'   

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Friday, November 17, 2017

आस्तिक- नास्तिक

लघुकथा  
             आस्तिक- नास्तिक
                              
                  
                                 पवित्रा अग्रवाल

       "दादी माँ ,आप भगवान को मानती हैं ?'-- डौली ने पूछा
 "ये कैसा प्रश्न है ?...तू मुझे रोज मंदिर जाते ,पूजा पाठ करते नहीं देखती है क्या ?'
   "हाँ देखती तो हूँ । बताइए दादी माँ,कहते हैं जीवन - मृत्यु भगवान के हाथ में है...उनकी इच्छा के बिना संसार में कुछ नहीं हो सकता ।"
    "तूने बिल्कुल ठीक सुना है बिटिया, उसकी इच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता ।'
   "दादी माँ सुना है कि जोड़ियां भी ऊपर से बन कर आती हैं यानी किस की शादी किस के साथ होगी,यह पहले से तय होता है ।'
    "हाँ , यह भी सच है ...लेकिन आज सुबह सुबह तू मुझ से यह सब क्यों पूँछ रही है ?
    ऐसे सवालों को लेकर मन में कुछ उलझन थी जो सुलझ नहीं रही थी ।'
 "अब उलझन सुलझ गई ?'
 "नहीं दादी अब तो और उलझ गई है ।'
 "मुझे बता क्या उलझन है ?'
     "बुआ की शादी के एक महीने बाद ही फूफा जी की मौत हो गई थी पर उनके ससुराल वालों ने उन्हें अशुभ कह कर घर से निकाल दिया था ...उसमें बुआ का क्या दोष था ?'
    "यही तो अज्ञानता है बिटिया ,उन में इतनी समझ ही नहीं है कि भगवान की सत्ता को समझ सकें ।'
    "पर दादी आप तो सब समझती हैं फिर भैया की मौत के लिए भाभी को दोषी ठहरा कर उन्हें उनके मॉ - बाप के घर क्यों भेज दिया ? '
      खा जाने वाली आँखों से घूरते हुए - "चुप रह  छोरी ,मैं तुझे समझा नहीं सकूँगी ।...मुझ से यह सब तेरे बाप ने नहीं पूंछा ,तू कौन होती है पूछने वाली ?...नास्तिक कहीं की ।'
 "लेकिन दादी ...'
    "चुप छोरी, मेरे मंदिर जाने का समय हो रहा है,मेरा दिमाग मत चाट ।' 
             
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