Monday, April 24, 2017

गैरों की तरह

लघु कथा

                            गैरों की तरह

                                                               पवित्रा अग्रवाल
                                       
    पत्नी ने पति से कहा -" गगन तुम माँ को बुला तो रहे हो पर ..."
  "पर क्या ?"
 "आज मेरी फोन पर उनसे बात हुई थी, वह बहुत खाँस रही थीं । अपना बच्चा अभी छोटा है, कहीं उसे भी इन्फैक्शन हो गया तो ,ऐसे में उन्हें बुलाना ठीक होगा ?"
  "अरे यार ऐसे गैरो की तरह मत सोचो ... वह मेरी माँ हैं यदि उन्हें खाँसी हो रही है तो यहाँ आने पर डाक्टर को दिखा देंगे।... पर परायों क़ी तरह मत सोचो है कि खाँसी की वजह से उनको यहाँ न बुलाएं ....अभी पिछले दिनो मुझे और तुम्हें दोनो को ही फ्लू हुआ था तो क्या हम तुम अपने बच्चे कि वजह से घर छोड़ कर कहीं चले गए थे ?'
  "तब तो हमारी मजबूरी थी ।'
        "अच्छा यदि यहाँ या वहाँ हम सब साथ रह रहे होते तो क्या करते ? उन को छोड़ कर हम होटल में रहने चले जाते या उन्हें दूसरी जगह भेज देते ?"
पत्नी का मुह लटक गया था
 -- "मुझे क्या है बुलाओ ।'

-पवित्रा अग्रवाल
ईमेल - agarwalpavitra78@gmail.com

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