Friday, September 4, 2015

पर उपदेश

लघु कथा 

                       पर उपदेश

 
                                                 पवित्रा अग्रवाल

            पड़ौसी मूर्ति जी ने घर में प्रवेश करते हुए कहा--"नमस्ते शुक्ला जी ''
 "नमस्ते,नमस्ते मूर्ति जी,कहिये कैसे हैं ?''
 "अच्छा हूँ,उस दिन हिन्दी दिवस पर आपका लैक्चर बहुत अच्छा रहा , बैंक में सभी बहुत तारीफ कर रहे थे।आपकी एक बात तो मुझे बहुत अच्छी लगी कि हमे अपनी मात्र भाषा का पेपर भी घर में अवश्य लेना चाहिए ।मैं पहले केवल इंगलिश का पेपर ही लेता था, अब तेलगू का भी लेने लगा हूँ।...मुझे थोड़ी देर के लिए आपका हिन्दी पेपर चाहिए।''
     शुक्ला जी मन ही मन परेशान हो उठे।अब क्या करूँ ,हिन्दी का पेपर तो मैं लेता नहीं, इन्हें कहाँ से दूँ।...वह कोई उपयुक्त बहाना बना पाते उस से पहले ही उनका बेटा बोल पड़ा -- "अंकल हमारे यहाँ  हिन्दी का पेपर नहीं आता है ।'
    झेंपते हुए शुक्ला जी ने कहा -"असल में घर में कोई पढ़ता नहीं है और मैं कालेज में पढ़ लेता हूँ ।'
 "नो प्रोबलम शुक्ला जी मैं मार्केट से मंगा लूँगा ।'

-- ईमेल - agarwalpavitra78@gmail.com

-पवित्रा अग्रवाल
 

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (06-09-2015) को "मुझे चिंता या भीख की आवश्यकता नहीं-मैं शिक्षक हूँ " (चर्चा अंक-2090) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तथा शिक्षक-दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद शास्त्री जी

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  2. बहुत ही शानदार रचना।

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    1. धन्यवाद कहकशां जी

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