Thursday, January 5, 2012

देश का दुश्मन

लघु कथा      

                         देश का दुश्मन
                                                                           पवित्रा अग्रवाल   

    किशोर वय के बच्चे ने अपनी मम्मी से पूछा -- "मम्मी मैं ने सुना हे पापा किसी आतंकवादी की   तरफ से मुकद्दमा  लड़ कर उस को बचाने का प्रयास कर रहे हैं ?'
 "अच्छा ?'
 "आपको नहीं पता ? '
 "मुझे क्या पता ...मुझे बता कर वह  मुकद्दमा  लड़ते हैं क्या ?'
 "पर मुझे पता है, वह देश में आंतक फैलाने वाले एक मुजरिम का केस लड़ रहे हैं ।'
 "हो सकता है ।'
 "पर क्यो मम्मी ?...हमारे देश में आतंक फैला कर सैंकड़ों की जान लेने वाले को पुलिस बड़ी   मुश्किल से दूसरे देश से पकड़ कर लाइ है,उसके बचाव में केस लड़ना क्या गलत नहीं ?'
 "बेटा वकीलों का तो काम ही ये होता है,जिसके वकील होते हैं उसे बचाने का प्रयास करते हैं,भले ही  वह दोषी हो।'
 "मम्मी ये तर्क मेरे गले नहीं उतर रहा है। मेरी समझ में एक देशद्रोही को सजा से बचाने वाले को    देश प्रेमी तो नहीं कहा जा सकता ।'

http://bal-kishore.blogspot.com/
  http://laghu-katha.blogspot.com/

 

8 comments:

  1. देश प्रेम! वो क्या होता है? बस जेब भरने से मतलब है॥

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  2. आपके सशक्त लेखन से अवगत हूँ . आपका ब्लाग पहली बार देखा.
    मेरी बधाई स्वीकार करें.

    मकर संक्रांति की शुभकामनाएं.

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  3. Vandana ji mere blog par aane ke liye dhanyvad .aapko laghu katha achchi lagi ,likhana sarthak hua .

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  4. Bhai chandra moleshwar ji aapki tippni ki aadat si ho gai hai .sarthak,chutili tippani ke liye aabhari hoon.

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  5. thanks for visiting my blog...
    i'm happy that u liked my poetries...
    :-)

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  6. सच लिखा है।

    http://yuvaam.blogspot.com/p/katha.html?m=0

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